शनिदेव राशि परिवर्तन है और इनके राशि परिर्वतन से चाल और नक्षत्र परिवर्तन से सभी 12 राशियों पर प्रभाव डालते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि शनिग्रह को सौरमंडल में मौजूद सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति का ग्रह माना जाता है। शनि को एक राशि से दूसरी राशि में जाने में ढाई साल का समय लगता है। शनि जिन जातकों की जन्मकुंडली में शुभ स्थिति में होते हैं, उन्हें शनि की साढ़े साती फलदायक साबित होती है।


इसी तरह से शनि किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली के 12वें, पहले, दूसरे और जन्म के चंद्र के ऊपर से होकर गुजरे तो शनि की साढ़े साती कहलाती है। शनि की साढ़े साती के तीन चरण होते हैं। पहला चरण बेहद कष्टकारी साबित होता है। पहले चरण में जातक को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूसरे चरण में जातक को पारिवारिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तीसरे चरण में शनि जातक को भूल सुधारने का मौका देते हैं।

शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण-
ज्योतिष के मुताबिक मकर राशि पर शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण चल रहा है। इस राशि में शनि वक्री अवस्था में भी विराजमान हैं। शनि के राशि परिवर्तन तक आपके लिए समय कष्टकारी साबित हो सकता है। 29 अप्रैल 2022 को शनि मकर से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस दौरान आपको कुछ राहत मिल सकती है। शनि के इस चरण में मकर राशि वालों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

कब मिलेगी मुक्ति
शनि 29 अप्रैल 2022 को मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। तब मकर राशि पर शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण शुरू होगा। मकर राशि वालों को शनि की महादशा से 29 मार्च 2025 को मुक्ति मिलेगी। इस दिन शनि मीन राशि में गोचर करेंगे।