मकर संक्रान्ति (Makar Sankranti) का त्योहार कुछ ही दिनों में आने वाला है। यह त्योहार साल का पहला त्योहार होता है। सभी त्योहारों की शुरूआत इसी त्योहार से होती है। यह त्योहार ग्रहों के मिलन के योग के कारण मनाया जाता है। मान्या के मुताबिक नए साल पर सूर्य देव (Sun God) जब राशि परिवर्तन कर दूसरे ग्रह में प्रवेश करते हैं तो वे शनि (Saturn) की राशि में मेहमान बन जाते हैं। बता दें कि सूर्य देव के पुत्र शनिदेव हैं।

पिता और पुत्र के मिलन पर यह त्योहार भारत देश में मनाया जाता है। इस मिलन के त्योहर पर काले​ तिल का संबन्ध शनिदेव (Shani Dev) से माना गया है और गुड़ का संबन्ध सूर्यदेव से माना गया है। संक्रान्ति के दिन सूर्यदेव (Sun God) शनि के घर मकर राशि में जाते हैं, ऐसे में  ज्योतिष में सूर्य और शनि दोनों ही ग्रहों को सशक्त माना गया है। ऐसे में जब काले तिल और गुड़ के लड्डुओं को दान किया जाता है।


इससे शनिदेव और सूर्यदेव दोनों ही प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से घर में सुख समृद्धि आती है। इसी के साथ वैज्ञानिक लिहाज से भी मकर संक्रान्ति के दिन काले ​तिल (black sesame) और गुड़ से बने लड्डू खाने और दान करने का विशेष महत्व बताया जाता है।

वैज्ञानिक कहते हैं कि मकर संक्रान्ति के दिनों पर उत्तर भारत कड़ाके की ठंड होती है।  गुड़ और तिल दोनों की तासीर काफी गर्म होती है। सर्दी में शरीर में गर्मी बनी रहे इसके लिए ये लड्ड खाए जाते हैं और दान भी किए जाते हैं। इससे शरीर को गर्माहट मिलने के साथ साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता (mmune system) मजबूत होती है।