शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2021) इस बार 7 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे हैं और 15 अक्टूबर को विजयादशमी (vijayadashami) के दिन समाप्त होंगे। इस बार उदयकालीन षष्ठी का क्षय होने से पंचमी व षष्ठी का पूजन एक ही दिन होगा यानि इस बार नवरात्र नौ दिन के ही होंगे। नवरात्र (Navratri 2021) प्रारंभ होने से पहले लोगों के मन में यह जिज्ञासा बनी रहती हैं कि इस बार मां दुर्गा (maa durga) अपने परिवार के साथ किस वाहन पर सवार होकर आएगी और किस वाहन से प्रस्थान करेंगी। भक्त मां दुर्गा के आगमन व प्रस्थान से ही आगामी वर्ष में आम जनता और राजनीति में होने वाली उथल-पुथल व देश में घटित होने वाली घटनाओं का फलादेश निकालते हैं। साधकों के लिए मां दुर्गा की आराधना करने के लिए नवरात्र सर्वोत्तम समय माना गया है। इसमें भी शारदीय नवरात्र का महत्व ज्यादा होता।

इस वर्ष नवरात्रा कलश स्थापना (navratri kalash sthapana) अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा गुरुवार को होने से मां दुर्गा का आगमन ‘डोली’ पर हो रहा है। डोली में माता का आगमन देश दुनिया और आमजनों के लिए शुभ नहीं माना जाता है। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में जन धन की हानि होने की आशंका रहेगी। राजनीति में भी उथल-पुथल देखने को मिल सकतर है। किसी रोग और महामारी का प्रकोप बढ़ सकता है। वहीं विजयादशमी शुक्रवार को होने से मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ ‘हाथी’ पर सवार होकर लौटेंगी। जिसका फल अत्यधिक वर्षा के साथ पानी की बढ़ोतरी होना है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन एवं प्रस्थान ‘वार’ (दिन) से जुड़ा हुआ है। आगमन यानि घट स्थापना यदि रविवार या सोमवार को नवरात्र प्रारंभ होती हैं तो मां दुर्गा हाथी पर, शनिवार या मंगलवार को घोड़े पर, गुरुवार या शुक्रवार को डोला पर और बुधवार को प्रारंभ होने पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं।

फल- गज (हाथी) पर आना पानी की बढ़ोतरी, घोड़ा पर आना युद्ध की आशंका, नौका पर आने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं डोली पर आने से आक्रांत रोग, मृत्यु का भय बना रहता हैं।

प्रस्थान - रविवार व सोमवार को विजयादशमी होती हैं तो मां दुर्गा भैंसा पर, शनिवार व मंगलवार को मुर्गा पर, बुधवार व शुक्रवार को गज पर तथा गुरुवार को नर वाहन पर प्रस्थान करती हैं।

फल- भैंसा पर प्रस्थान करना शोक का माहौल, मुर्गा पर जन मानस में विकलता, गज पर शुभ वृष्टि, नरवाहन पर शुभ सौख्य रहती हैं।