न्याय के देवता कहे जाने वाले देव शनि देव (Shani Dev) हैं। यह सभी राशियों में सबसे ज्यादा धीमी चाल चलने वाले ग्रह हैं। यह राशियों के जातकों के कर्मों को हिसाब रखते हैं जिससे उनके फल दिया जाता है। ज्योतिष के मुताबिक वर्तमान में शनि देव (Shani Dev) अपनी पहली राशि मकर में गोचरीय संचरण कर रहे है जो 28 अप्रैल 2022 तक संचरण करते रहेंगे उसके बाद 29 अप्रैल 2022 को अपनी दूसरी राशि राशि में प्रवेश करेंगे।

नए साल में शनि किसी को अपने साढ़े साती (Shani Sade Sati) से मुक्त करेंगे तो किसी को ग्रस्त करेंगे। ऐसा नही है कि शनि की साढ़ेसाती केवल कष्टकारक ही होती है अपितु इनकी साढेसाती राजयोग भी प्रदान करती है।
शनि की साढ़ेसाती (Shani Sade Sati) और शनि ढैय्या (Dhaiya)-

शनि देव के कुम्भ राशि के संचरण से 29 अप्रैल 2022 के बाद धनु राशि वाले साढ़े साती के प्रभाव से मुक्त होंगे तथा मिथुन एवं तुला राशि वाले ढैय्या (Dhaiya) के प्रभाव से मुक्त हो जाएंगे। मकर राशि के लिए उतरती एवं कुम्भ राशि के लिए मध्य तथा मीन राशि वालों के लिए चढ़ती साढेसाती (Shani Sade Sati) चलने लगेगी।

कर्क एवं वृश्चिक राशि वालों पर सामान्य अढ़ैय्या चलेगी। शनि 17 जुलाई 2022 तक कुम्भ राशि मे मार्गी एवं वक्री गति से संचरण करेंगे। उसके बाद वक्री गति से पुनः मकर राशि में प्रवेश करके वर्तमान स्थिति को प्राप्त करेंगे जहाँ 16 जनवरी 2023 तक विद्यमान रहकर अपना प्रभाव स्थापित करेंगे। अर्थात 17 जुलाई 2022 से 16 जनवरी 2023 तक पुनः धनु, मकर और कुंभ राशि के लोग साढ़े साती के प्रभाव में  तथा मिथुन एवं तुला राशि वाले ढैया (Dhaiya) के प्रभाव में रहेंगे।