हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक माह की चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को समर्पित होती है। लेकिन माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी बेहद खास होती है। इसे सकट चतुर्थी या Sakat Chauth या तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है। सकट चौथ के दिन महिलाएं गणेश की पूजा करती हैं। इसी के साथ ही वो संतान की सेहत, सुख समृद्धि और दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत करती हैं। माना जाता है कि जिस पर विघ्नहर्ता गणपति की कृपा हो जाए, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।



ऐसे में अपनी संतान के लिए सकट चौथ का व्रत रखना काफी लाभदायक है। पूजा के दौरान अपनी संतान के सुखी जीवन के लिए गणपति की एक स्तुति जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही Sakat Chauth ki Kahani भी सुनना चाहिए इससें फल दोगुना मिलता है।



Sakat Chauth पर भगवान गणेशजी की आराधना शुरू करने के लिए आप सुबह उठकर स्नानादि के बाद गणपति का विधि विधान से पूजन करें। उसके बाद संतान के सुखी जीवन की कामना के साथ पूरी श्रद्धा से इस गणेश स्तुति 11 बार पढ़ें। इसके बाद नियमित रूप से इसे पूजा के समय पढ़ें।



इसके फलस्वरूप कुछ ही समय में आपकी सं​तान की हर मुसीबत और बाधाएं दूर होने लगेंगी और बिगड़े काम भी बनने लगेंगे। आपकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इससे आपके जीवन में खुशियों का वास होगा।


सकट चौथ गणेश मंत्र
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।।