गरुड़ पुराण में इंसान के जीवन, कर्म और मृत्यू के बारे में बताया गया है। भगवान श्री हरि विष्णु ने मृत्यु के बाद प्राणियों की स्थिति के बारे में पक्षीराज गरुड़ को बताया है। उन्होंने बताया कि जीव की यमलोक यात्रा, विभिन्न कर्मों से प्राप्त होने वाले फल के हिसाब से दी जाती है।

विष्णु के उपदेश गरुड़ पुराण में उल्लेख किया गया है। जीवन और कर्म के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है। गरुड़ पुराण 18 पुराणों में से एक इस महापुराण का विशेष महत्व है। गरुड़ पुराण एक वैष्णव पुराण है। गरुड़ पुराण में भगवान श्री हरि विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन किया गया है।

गुरुड़ पुराण में जीव की मृत्यु के उपरांत 28 अपराधों और सजाओं का उल्लेख भी है। इन 28 अपराधों की सजा को नरक में भोगना पड़ता है। इस पुराणा में 28 अपराधों में बताया गया है कि जो लोग दूसरों की संपत्ति पर कब्ज़ा करते हैं उन्हें नरक में मुग्दरों से पीटा जाता है।


इसी के साथ जो पति पत्नी अपने रिश्ते को ईमानदारी से नहीं निभाते हैं उन्हें रस्सी से इतना कसकर बांधा जाता है जब तक वह बेहोश न हो जाएं। जो लोग दूसरों के अधिकार छीनते हैं उन्हें जहरीले सांपों से कटवाया जाता है। जानवरों की हत्या करने वालों को गर्म तेल में उबाला जाता है। गरुड़ पुराण में आदेश दिया गया है कि किसी से उधार लिए धन का पूरा भुगतान करें। मनुष्य को अपने स्वास्थ्य को लेकर कभी लापरवाह नहीं होना चाहिए। बुरी आदतों से दूर रहना चाहिए।

ब्राह्मण को मारना, पवित्र कसमों को तोड़ना, भ्रूण हत्या गंभीर पाप है। किसी महिला की हत्या करना, महिला को प्रताड़ित करना, किसी के विश्वास को धोखा देना गरुड़ पुराण में घोर पाप माने गए हैं। पवित्र अग्नि, पवित्र पानी, बगीचे या गोशाला में मलमूत्र का त्याग करने वाले और गोहत्या करने वालों के लिए गरुड़ पुराण में सख्त सजा का जिक्र किया गया है। गरुड़ पुराण का सार यह है कि हमें आसक्ति का त्यागकर वैराग्य की ओर प्रवृत्त होना चाहिए।