कार्तिक मास (Kartik month) में त्रयोदशी तिथि को धनतेरस (Dhanteras) के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के मुताबिक धनतेरस का त्योहार समृद्धि प्रदान करता है। कहा जाता  है कि समुद्र मंथन से भगवान धनवंतरी (Lord Dhanvantari) अमृत से भरा स्वर्ण कलश और स्वर्ण रजत आभूषणों के साथ प्रकट हुए थे।


उनके प्राकट्योत्सव के रूप में इस पर्व का नाम धन त्रयोदशी या धनतेरस (Dhanteras) पड़ा।  जैसे कि हम जानते हैं कि धनतेरस पर नए बर्तन, सोना, चांदी और आभूषणों को खरीदना शुभ माना गया है। मान्यता के अनुसार धनतेरस पर की गई खरीदारी से घर की समृद्धि में 13 गुना वृद्धि होती है।

दिवाली (Diwali 2021) पर धनतेरस का दूसरा महत्व दीपदान को लेकर है। धनतेरस पर संध्याकाल में दक्षिण दिशा की ओर दीप प्रज्ज्वलित करने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। ज्योतिषविद् का कहना है कि धनतेरस पर स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया मुहूर्त (Choghadiya Muhurta) में खरीदारी करना सबसे शुभ होता है।

धनतेरस मुहूर्त (Dhanteras Dhanteras)-

  • सुबह 8 से 10 बजे के बीच खरीदारी के लिए सबसे शुभ समय होगा।
  • इसमें स्थिर लग्न (वृश्चिक) उपस्थित रहेगी, इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10:40 से दोपहर 1:30 के बीच होगा।
  • इस समय में लाभ और अमृत के शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपस्थित रहेंगे।
  • इसके बाद दोपहर 1:50 से 3 बजे के बीच भी खरीदारी के लिए स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त होगा।
  • संध्याकाल में 6:30 से रात्रि 8:30 के बीच स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त रहेगा।
  • दोपहर में तीन बजे से 4:30 बजे के बीच राहुकाल रहेगा, इसलिए इस समय में खरीदारी से बचें।