तीर्थनगरी में भाद्रपद पूर्णिमा तिथि 20 सितंबर से श्राद्ध तर्पण करने के लिए श्रद्धालु जुटेंगे। सुबह साढे पांच बजे पूर्णिमा तिथि लगने के बाद श्रद्धालु अपने दिवंगत प्रियजनों जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ है उनका श्राद्ध हरिपदी के तट पर करेंगे। 

श्राद्ध पक्ष में तीर्थनगरी में प्रतिदिन औसतन तीन से चार हजार श्रद्धालु अपने दिवंगत जनों का अस्थि विसर्जन, पूर्वजों का श्राद्ध व जल तर्पण करने आते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। श्रद्धालुओं के साथ साथ तर्पण कराने के लिए तीर्थपुरोहितों ने भी तैयारियां की हैं। 

तर्पण के लिए आवश्यक सामग्री कुश, काले तिल, चावल, जौ आदि सामग्री का तीर्थपुरोहितों ने पर्याप्त संचय कर लिया है। यूं तो हरिपदी के सभी घाटों पर श्राद्ध तर्पण किया जा सकता है, लेकिन वाराह मंदिर वाले घाट पर पंडित धर्मधर शास्त्री व लक्ष्मण मंदिर घाट पंडित शशिधर शास्त्री विधिविधान पूर्वक पूरे श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध एवं तर्पण कर्मकांड कराएंगे।