गोवत्स द्वादशी (Govats Dwadashi 2021) का त्योहार पर गाय की महिमा के बारे में बखान किया जाता है। इस साल यह त्योहार 2 नवंबर को है। धन हो तो दूध देने वाली स्वस्थ गाय का दान करना चाहिए। कम से कम पांच, दस या सोलह बरस तक इस व्रत को करने के बाद ही उद्यापन करना चाहिए।

 गोवत्स द्वादशी (Govats Dwadashi) इस व्रत को करने वाला अति उत्तम भोगों के साथ-साथ मृत्यु के बाद गोलोक धाम की प्राप्ति करता है।  वे लोग, जिनकी संतान पर शनि की साढे़साती (धनु, मकर और कुंभ राशि वाले जातकों पर) ढैय्या (मिथुन, तुला राशि वाले जातकों पर) चल रही है, उन्हें यह व्रत स्वयं रखना चाहिए।
बताया जाता है कि इस दिन गायों (Cow) को हरा चारा अपने हाथ से जरूर खिलाना चाहिए। गाय-बछड़ा न होने पर गाय-बछड़े की बनी मूर्ति की ही पूजा करें। इस बात का स्मरण रखें कि आज के दिन खाद्य पदार्थों में गाय का दूध, दही, घी, छाछ, खीर, तेल के पके हुए भुजिया-पकौड़ी या अन्य कोई पदार्थ न लें।