कार्तिक माह (Kartik month) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन धन के देव कुबेर (Kuber), मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi), धन्वंतरि और यमराज की पूजा की जाती है। मान्यता मुताबिक इस दिन सोना, चांदी या बर्तन आदि खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस (Dhanteras) के दिन सोना, चांदी, तांबा, पीतल आदि के बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में खरीददारी करने से उसका उचित फल प्राप्त होता है। इस बार धनतेरस दो नवम्बर को है। धनतेरस (Dhanteras 2021) के अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाया जाता है। बता दें कि इसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है।
धनतेरस पूजा विधि (Dhanteras puja vidhi) -

धनतेरस की शाम के समय उत्तर दिशा में कुबेर, धन्वंतरि भगवान और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
पूजा के समय घी का दीपक जलाएं।
कुबेर को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई चढ़ाएं।
पूजा करते समय कुबेर मंत्र का जाप करना चाहिए।
फिर धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करना चाहिए।
माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को भोग लगाएं और फूल चढ़ाना चाहिए।
धनतरेस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है।
शास्त्रों में वर्णित है की कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी की रात यम देवता का पूजन कर दक्षिण दिशा की ओर भेंट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
इसलिए इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखा जाता है।