हम सबके घर में एक छोटा या बड़ा मंदिर जरूर होता है। लेकिन पूजा पाठ कभी-कभी किया जाता है या फिर कई लोग रोज पूजा करते हैं। पूजा पाठ करने से भी घर में सुख शांति नहीं है और आर्थिक तंगी, पैसों की तंगी से परेशान है तो आपने मूर्ति स्थापना वास्तु मुताबिक नहीं। जानकारी दे दें कि घर हो या कार्य क्षेत्र में देवी देवताओं की मूर्ति वास्तु के अनुसार ही स्थापित करें। जानिए कैसे......

भगवान की मूर्ति को सही दिशा और सही स्थान पर रखने का वास्तु नियम (vastu rules idols)-

- माता लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा के विशेष नियम बताए गये हैं जैसे माता लक्ष्मी को हमेशा उत्तर दिशा में रखना चाहिए। घर में कभी भी खड़ी हुई लक्ष्मी की प्रतिमा को नहीं रखना चाहिए। इसी प्रकार माता लक्ष्मी की मूर्ति (Laxmi Idol) को कभी भी दीवार से सटाकर नहीं रखना चाहिए।
- मंदिर में हमेशा धन की देवी मां लक्ष्मी की मूर्ति को गणपति की मूर्ति (Ganpati Idol) के दाहिने हाथ की तरफ और भगवान विष्णु के बाईं तरफ रखना चाहिए।
- वास्तु के अनुसार देवी दुर्गा की पूजा को हमेशा ईशान कोण में कुछ इस तरह से स्थापित करना चाहिए कि पूजा करते समय आपका मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहे।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति (Hanuman Idol)लगाने से घर में किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा या बुरी शक्ति प्रवेश नहीं करती हैं। इसी प्रकार दक्षिण दिशा में हनुमान जी की मूर्ति या फोटो लगकार पूजा करने पर शीघ्र ही हनुमत कृपा प्राप्त होती है।
-  वास्तु शास्त्र के अनुसार शिवलिंग (Shivling)को किसी देवालय, आंगन, शमी के पेड़ के नीचे, नदी किनारे या पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित करके पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है हालांकि आप चाहें तो अपने घर के मंदिर या फिर कहें पूजाघर में पारद शिवलिंग को स्थापित करके पूजा कर सकते हैं।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार गणपति (Ganapati) की मूर्ति को हमेशा घर के मुख्य द्वार के ऊपर स्थापित करना अत्यंत शुभ रहता है। ऐसा करने पर घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं प्रवेश कर पाती है और घर में मंगल कार्य होते रहते हैं।
- मंदिर या फिर पूजा स्थल पर भगवान की मूर्ति को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इसके लिए लाल रंग का आसन बिछाकर उस देवी-देवताओं की मूर्ति को रखें, फिर पूजन करें।
    

- पूजा स्थल पर कभी भी दो शंख, दो सूर्य, दो शिवलिंग, तीन गणपति, तीन दुर्गा जी की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए।
(यह आलेख सिर्फ जनरुचि के लिए हैं, यह आलेख इन सब का दावा नहीं करता है। यह लौकिक मान्यता आधारित है।)