निर्जला एकादशी का व्रत उदया तिथि के अनुसार इस साल 11 जून, शनिवार को रखा जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, निर्जला एकादशी 10 या 11 जून दोनों दिन रखा जा सकता है। हालांकि 11 जून को उदया तिथि में व्रत रखना उत्तम माना जा रहा है। निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। 

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कहते हैं कि इस एकादशी का व्रत करने से सभी 23 एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन कुछ खास उपायों को करके भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जा सकता है। मान्यता है कि इन उपायों को करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जानें निर्जला एकादशी के दिन किए जाने वाले उपाय-

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निर्जला उपवास- इस दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण करने की मनाही होती है। जिसके कारण इस एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस एकादशी व्रत को रखता है, उसे सभी एकादशियों का फल एक बार में ही मिल जाता है। भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा हमेशा रहती है।

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जल दान- निर्जला एकादशी के दिन जल दान करना अति उत्तम माना जाता है। आप अपनी सामर्थ्यनुसार जल वितरण या कहीं प्याऊ भी लगवा सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृदोष दूर होता है।

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पीपल के वृक्ष को जल- निर्जला एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की जल में जल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही वृक्ष की विधिवत पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है व कर्ज से मुक्ति मिलती है।