दिवाली (Diwali) की साज सज्जा की तैयारियां चल रही है। अभी सभी लोग घर की साफ सफाई में लगे हुए हैं। साफ सफाई इसलिए की जाती है क्योंकि मां लक्ष्मी साफ सुथरी जगहों पर वास करती है। मां लक्ष्मी के आगमन पर कई तरह की चीजें की जाती है। इसी तरह से दिवाली के दिन शाम को मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) की पूजा की जाती है। पूजा में खास बातों का ख्याल रखा जाए तो पूजा सिद्ध होती है और मां लक्ष्मी मेहरबान रहती है।
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पूजा करते समय जरूर ध्यान रखें-

  • दिवाली (Diwali) के पूजा रात्रि के विशेष मुहूर्त में की जाती है। मान्यता अनुसार चौघड़िया का महायोग और शुभ कारक लग्न देखकर रात्रि में लक्ष्मी पूजा का प्रचलन प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। लक्ष्मी कारक योग (Lakshmi Karak Yoga) में पूजा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है तो दूसरी ओर अच्छी और शुद्ध भावना से लक्ष्मी की पूजा से धन और समृद्धि बढ़ती है।
  • इस दिन प्रात: उठकर नित्यकर्म से निवृ‍त्त होकर पूजा की तैयारी कर लें। पूजा के समय घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर ही पूजा करें। पूजा जमीन पर ऊनी आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए।
  • पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें और ना ही किसी अन्य प्रकार की गतिविधियों पर ध्यान दें। ईश्वर के लिए जलाए जाने वाले दीपक के नीचे चावल अवश्य रखने चाहिए। पूजा के दौरान कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए।

  • तांबे के पात्र में चंदन नहीं रखना चाहिए और न ही पतला चंदन देवी-देवताओं को लगाएं।
  • पूजा के पूर्व घर आंगन को अच्‍छे से सजाएं। द्वार देहरी पर रंगोली और मांडने बनाएं। द्वार पर वंदनवार लगाएं, नियम से उचित संख्या में दीए लगाएं और मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) के पदचिह्न मुख्य द्वार पर ऐसे लगाएं कि कदम बाहर से अंदर की ओर जाते हुए प्रतीत हों।
  • घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए। लक्ष्मी पूजा के समय सात मुख वाला घी का दीपक जलाना चाहिए। इससे माता लक्ष्मी (Maa Lakshmi)  की कृपा हमेशा बनी रहती है।
  • इस दिन किसी भी प्रकार का व्यसन करना या जुआ खेलना वर्जित है। मान्यता अनुसार इस दिन किसी के घर नहीं जाते। दिवाली मिलन का कार्य पड़वा के दिन किया जाता है।
  • आरती के बाद हमेशा दोनों हाथ से उसे ग्रहण करें।
  • पूजा-पाठ बगैर आसन के नहीं करना चाहिए।