शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का पर्व आने वाला है। मां दुर्गा (Maa Durga) का पूजन अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नवमी तिथि तक चलता है। इस बार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष 7 अक्टूबर गुरूवार से आरंभ और नवमी तिथि 14 अक्टूबर गुरूवार को सपंन्न हो रहे हैं। नवरात्री (Shardiya Navratri) के बाद इसके बाद विजय दशमी (Vijay Dashami) नवरात्रि (Shardiya Navratri)में मां नव दुर्गा के नव रूपों की पूजा की जाती है। जो इस प्रकार हैं-


शैलपुत्री (Shailputri):
मां नव दुर्गा (Maa Durga) का पहला रूप शैलपुत्री देवी (Shailputri) का है। नवरात्रि के प्रथम दिन इनकी पूजा की जाती है। हिमालयराज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री (Shailputri) कहा जाता है और ये माता पार्वती (Mata Parvati) का ही एक रूप हैं।ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini): ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) देवी मां नव दुर्गा (Maa Durga) का दूसरा रूप है। मां पार्वती (Mata Parvati) ने घोर तपस्या करके भगवान शिव (Lord Shiva) को पति के रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण इनका नाम ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini) पड़ा। चंद्रघंटा (Chandraghanta) : यह  मां दुर्गा (Maa Durga) का तीसरा रूप है और इनकी पूजा तीसरे दिन की जाती है। ये भगवान शंकर (Lord Shiva) के मस्तक पर अद्धचंद्र घण्टे के रूप में सुशोभित है। इसी लिए इन्हें चंद्रघण्टा (Chandraghanta) के नाम से जाना जाता है।

कूष्मांडा (kushmanda):
मां दुर्गा (Maa Durga)के चौथे रूप को कुष्मांड़ा देवी (kushmanda) कहा जाता है। इनकी पूजा नवरात्रि में चौथे दिन विधि-पूर्वक की जाती है। ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था इस लिए इन्हें कूष्मांडा (kushmanda) माता कहते है। इन्हें जगत जननी (Jagat Janani) भी कहा जाता है।स्कंदमाता (Skandmata): मां दुर्गा (Maa Durga) के 5वें रूप को स्कंदमाता (Skandmata) कहते हैं। इन्होंने भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय (Kartikeya) या स्कंद को जन्म दिया था जिसके कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। कात्यायनी (Katyayani): मां दुर्गा (Maa Durga) का छठा रूप है। कात्यायनी देवी (Katyayani) की पूजा नवरात्रि के 6वें दिन की जाती है। इनका जन्म कात्यायन ऋषि (Katyayan Rishi) की साधना और तप से होने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा गया है।

कालरात्रि (kaalratri):
मां दुर्गा (Maa Durga) सातवां रूप हैं। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि (kaalratri) का पूजन किया जाता है। कालरात्रि का रूप माता दुर्गा ने दैत्यों (monster) के नाश करने और भक्तों को अभय देने के लिए धारणकिया था.  महागौरी (Mahagouri): मां दुर्गा (Maa Durga) का आठवां रूप महागौरी का है। मान्यता है कि अति कठोर तप के कारण इनका वर्ण कला पड़ गया था। तब भगवान शिव जी (Lord Shiva) ने गंगा जल  (ganga jal) छिड़क कर इन्हें पुनः गौर वर्ण प्रदान किया था। इसी कारण इन्हें महागौरी का नाम दिया गया।
सिद्धिदात्री (siddhidatri):
दुर्गा माता (Maa Durga) का यह नवां रूप है। सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा नवरात्रि के अंतिम दिन की जाती है। इसलिए ही इनका नामा सिद्धिदात्री देवी (siddhidatri) पड़ा. इनके पूजन कर भक्त सभी प्रकार के सुख, धन वैभव और सौभाग्य की प्राप्ति करता है।