नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी को अर्पित होता है। इस दिन मां की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। मां कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी पूजा से कन्या के विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बृज की गोपियों ने माता कात्यायनी की पूजा की थी।


बताया जाता है कि यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। माता कात्यायनी की पूजा से देवगुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं। कात्यायन ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने पुत्री के रूप में उनके घर जन्म लिया था। इसलिए मां का नाम कात्यायनी पड़ा है। मां को लाल रंग बहुत प्रिय है। उन्हें शहद का भोग लगाया जाता है। मां की उपासना में उन्हें लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। मां कात्यायनी ने ही महिषाषुर का वध किया था।


माता की उपासना से शत्रु पराजित हो जाते हैं। जीवन सुखमय बनता है और धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां की आराधना से करने से रोग और भय जीवन से खत्म हो जाते हैं। मां की कृपा से सारे कार्य पूरे हो जाते हैं। सभी संकटों का नाश होता है। मां के भक्तों में अद्भुत शक्ति का संचार होता है। मां की उपासना से भक्तों को अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है।