व्यक्ति के Karma जनम-मरण दोनों में साथ रहता है। इंसान की योनी में आने के बाद उसे हर एक कर्म का हिसाब देने पड़ता है। कर्म अच्छे और बुरे दोनों होते हैं, जिसका फल हमें उसी जन्म में मिलता है और दूसर जन्म यानी पुनर्जन्म में भी मिलता है ऐसा कहा जाता है। पुनर्जन्म के कर्मों के आधार पर ही आपका भाग्य (Luck) निर्धारित होता है।


शास्त्रों में बताया गया है कि यदि आपके पिछले कर्मों में पाप की भा​गीदारी ज्यादा होगी, तो आपका आज का जीवन भी कष्टमय होगा और आपको दुर्भाग्य का सामना करना पड़ेगा लेकिन परमेश्वर ने कर्म करने की शक्ति मनुष्य को हर जन्म में दी है। अगर आप इस जन्म में भी बेहतर और पुण्यदायी काम करते हैं तो अपने पूर्व जन्म के तमाम पापों का अंत कर सकते हैं और अपने दुर्भाग्य (Bad Luck) को सौभाग्य (Good Luck) में बदल सकते हैं। जैसे-
पुनर्जन्म के कर्म सुधार के उपायः-
– अगर आप जाने अनजाने किए गए पापों से मुक्ति चाहते हैं तो बेजुबानों की सेवा करें. गाय, कुत्ता, पक्षी, चींटी, मछली आदि को नियमित रूप से भोजन कराएं।– हर अमावस्या के दिन कुछ न कुछ दान करने का नियम बनाएं। अमावस्या पितरों को समर्पित तिथि है। इस दिन किया गया दान पितरों के लिए होता है। इससे तमाम पाप कटते हैं, पितरों का आशीर्वाद मिलता है और उनके ऋण से मुक्ति मिलती है। पितृ दोष का प्रभाव दूर होता है।
– गीता, रामायण, सुंदरकांड आदि कोई भी पाठ कुछ देर नियमित रूप से करें। इससे आपका मन शुद्ध होगा और आपके पिछले जन्म के पाप कटेंगे। साथ ही आपका वर्तमान जीवन सुखमय हो जाएगा।
– पीपल और बरगद के पेड़ को दैवीय माना गया है। इनकी नियमित रूप से पूजा करनी चाहिए. इन्हें जल देना चाहिए। अगर संभव हो तो अपने जीवन में पीपल या बरगद का एक पौधा जरूर लगाएं। इन पेड़ों की सेवा करने से आपकी पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है।
–  लगातार 7 अमावस्या तिथि पर 9 पीपल लगाएं या लगवाएं। इनकी देखरेख करें। इससे आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी और आपका भाग्य चमक उठेगा। संभव हो तो इस दिन गुप्त दान जरूर करें।(यह आलेख सिर्फ जनरुचि के लिए हैं, यह आलेख इन सब का दावा नहीं करता है। यह लौकिक मान्यता आधारित है।)