प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश सुख, सुख-समृद्धि के दाता कहे जाते हैं। उनकी पूजा से सारे काम निर्विघ्न संपन्न हो जाते हैं। अभी शादियों का सीजन चल रहा है। शादी वाले घर गणेश  जी को न्यौता देने जाते हैं और दुआ करते हैं कि उनके सारे काम निर्विघ्न पूरे हो जाए। ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश की आराधना के बिना वास्तु देवता की संतुष्टि नहीं होती है। इसलिए गणेश की पूजा उपासना से ही हर प्रकार के वास्तु दोष दूर हो जाते हैं।

इसी तरह से वास्तु दोष घर में रहता है तो घर में सुख शांति नहीं रहती है। किसी न किसी तरह की अडचने आती ही रहती है। वास्त के अनुसार परिवार में आनंद, उत्साह व सुख-समृद्धि के लिए गणेश जी की मूर्ति को शुभ मुहूर्त में घर में स्थाउपित करना चाहिए और गणेश जी की आराधना करनी चाहिए। जानकारी के लिए बता दें कि पीत वर्ण के गणपति सर्वोत्तम माने जाते है, इसलिए इनकी पूजा की जाती है। गणेश जी की पूजा पूरे विधि विधान के साथ ही पूरी करनी चाहिए।


विधि विधान के साथ पूजा करने पर घर का वास्तु दोष दूर होता है और घर में समृद्धि आती है। बता दें कि कभी भी गणेश जी घर में एक से ज्यादा मूर्ती नहीं रखनी चाहिए। घर में सिर्फ एक ही श्रीगणेश की मूर्ति स्थापित करें। श्वेत रंग के गणपति की पूजा से सुख एवं समृद्धि का प्रवाह होता है और पीले रंग की गणेश जी की मूर्ती से ज्ञान मिलता है इसलिए इसे बच्चों के रूम में ही रखें। घर में गणेश जी की शयन हुई मुद्रा में मूर्ति शुभ होती है। घर में विघ्नहर्ता गणपति की रोज पूजा करने से कलह, तनाव, मानसिक दोष दूर होते हैं।