अभी पितृ पक्ष चल रहा है। पितृ पक्ष में पितर दूसरे लोक से धरती पर अपने परिजनों से मिलने आते हैं। जैसे कि हम जानते हैं कि पितृ पक्ष की शरुआत गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी के बाद शुरू होता है। पितृ पक्ष हर साल श्राद्ध भाद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक चलता है।


श्राद्ध पूरे 16 दिन के होते हैं। यह पर्व 6 अक्टूबर को समाप्त हो जाएंगे। आपको जानकार हैरानी होगी कि देश में श्राद्धदेव का एकमात्र मंदिर है जो कुरुक्षेत्र के पास स्थित पिहोवा में है। इसे पृथुदक तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। मान्‍यता के मुताबिक पांडवों ने इसी जगह पर अपने सगे संबंधियों का श्राद्ध और पिंडदान किया था। यहां  सरस्वती तट पर श्राद्धदेव का मंदिर है जिसमें यमराजजी की मूर्ति स्‍थापित है।


बताया जाता है कि इस मंदिर की स्‍थापना महाभारत काल में ही हुई थी। इस मंदिर का उल्लेख श्रीमद्भागवत महापुराण दशम स्कन्ध में महात्‍मा विदुर द्वारा की जाने वाली तीर्थ यात्रा में मिलता है। मान्यता के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान पितरों को पिंडदान कराया जाता है। कई लोग अपने घरों में ही पूजा-पाठ और खाना बनाकर पितरों को भोजन कराते हैं तो कुछ विष्णु का नगर यानी गया में जाकर अपने पूर्वजों का पिंडदान करते हैं।