होली का त्योहार आने वाला है। इस त्योहार में रंगों से खेला जाता है लेकिन क्या हो अगर होली राख से खेली जाए। वैसे से तो लोग मजाक मस्ती में गोबर और किचड़ से भी खेलते लेकिन भारत में एक जगह ऐसी भी है जहां शमशान में चिता की राख से होली खेली जाती है। आपको जानकर हैरानी हो रही होगी लेकिन यह सच है कि चिताओं की राख से भी होली खेली जाती है।
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चिता की राख से होली-


काशी के महाश्‍मशान में रंगभरी एकादशी के दिन खेली गई होली बाकी होली से बहुत अलग होती है क्‍योंकि यहां रंगों से नहीं बल्कि चिता की राख से होली खेली जाती है। मोक्षदायिनी काशी नगरी के महाशमशान हरिश्चंद्र घाट पर चौबीसों घंटे चिताएं जलती रहती हैं।
कहा जाता है कि यहां कभी चिता की आग ठंडी नहीं होती है। पूरे साल यहां गम में डूबे लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने आते हैं लेकिन साल में एकमात्र होली का दिन ऐसा होता है जब यहां खुशियां बिखरती हैं। रंगभरी एकादशी के दिन इस महाश्‍मशान घाट पर चिता की राख से होली खेली जाती है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को आज 20 दिन पूरे

हो चुके हैं लेकिन युद्ध खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। रूस को अभी कई

तरह के प्रतिबंध लागू किए जा चुके हैं। अमेरिका के सैनिक भी रूस के सैनिकों

को दबाने कोशिश में लगे हुए हैं। रूस फिर भी युद्ध खत्म करने का नाम नहीं

ले रहा है। जैसे कि बता दें कि रूस-यूक्रेन की जंग ने दुनिया को दो धड़ों

में बांट दिया है।


कुछ देश और ताकतवर लोग यूक्रेन के साथ हैं तो कुछ

लोग रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin को सही ठहरा रहे हैं। इस बीच

स्पेसएक्स के CEO Elon Musk ने पुतिन को खुला चैलेंज दे डाला है।



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350 साल पुरानी है परंपरा


इस साल भी 14 मार्च को वाराणसी में रंगभरी एकादशी के दिन श्मशान घाट पर रंगों के साथ चिता की भस्म से होली खेली गई। इस दौरान डमरू, घंटे, घड़ियाल और मृदंग, साउंड सिस्टम से निकलता संगीत जोरों पर रहा। कहते हैं कि चिता की राख से होली खेलने की यह परंपरा करीब 350 साल पुरानी है।
इसके पीछे कहानी है कि भगवान विश्‍वनाथ विवाह के बाद मां पार्वती का गौना कराकर काशी पहुंचे थे। तब उन्होंने अपने गणों के साथ होली खेली थी. लेकिन वे श्मशान पर बसने वाले भूत, प्रेत, पिशाच और अघोरियों के साथ होली नहीं खेल पाए थे। तब उन्‍होंने रंगभरी एकादशी के दिन उनके साथ चिता की भस्‍म से होली खेली थी। आज भी यहां यह परंपरा जारी है और इसकी शुरुआत हरिश्चंद्र घाट पर महाश्मशान नाथ की आरती से होती है। इसका आयोजन यहां के डोम राजा का परिवार करता है।