गुप्त नवरात्र गुरुवार से आरंभ हो रहे हैं। सनातनी परंपरा के अनुसार नवरात्रि चार बार आते हैं। दो सामान्य व दो गुप्त नवरात्रि आते हैं। आषाढ़ मास में आने वाले नवरात्रि को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुरुवार से आषाढ़ गुप्त नवरात्र शुरू हो रहे हैं, जो 8 जुलाई तक रहेंगे। गुप्त नवरात्र के दौरान गुप्त रूप से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

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गुप्त नवरात्रि के पीछे यह विचार प्रचलित है कि इस दौरान मां दुर्गा की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। ऐसा करने से पूजा का फल कई गुना ज्यादा मिलता है। गुप्त नवरात्र के दिनों में सुख-समृद्धि व शांति के लिए कुछ खास उपाय किए जाते हैं।  गुप्त नवरात्र में पूजा, साधना, उपासना का कई गुना फल मिलता है। 

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 महाकाल संहिता के अनुसार सतयुग में चैत्र नवरात्र, त्रेता युग में आषाढ़ नवरात्र, द्वापर में माघ नवरात्र और कलयुग में अश्विन नवरात्र की प्रमुखता रहती है। शाक्त ग्रंथों में चारों नवरात्रों में शक्तिपूजा का महत्व बताया गया है। वह कहते हैं कि गुरुवार से पहला नवरात्र है। मां का प्रथम दिव्य स्वरूप मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए दोपहर 11 से 3 बजे तक भोग का मुहूर्त है। शैलपुत्र प्रकृति की देवी हैं। इसलिए तुलसी का पौधा लगाया जाना अत्यंत शुभकारी है। मां शैलपुत्री को अनार के साथ मीठे पान का भोग श्रद्धापूर्वक लगाने से कर्ज और रोगों से मुक्ति के योग बनते हैं।