गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) है। बता दें कि प्रतिपदा के नाम से भी जाना जाता है। परंपरा के अनुसार गोवर्धन के दिन घर के आंगन, छत या फिर बाहर गोबर से गोवर्धन (Govardhan) बनाया जाता है और इसकी विधि विधान के साथ गोवर्धन बाबा (Govardhan Baba) की पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन 51 सब्जियों को मिलाकर अन्नकूट बनाकर भोग लगाया जाता है।
गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)-

त्रेतायुग में भगवान इंद्र (Lord Indra) ने बृजवासियों से नाराज होकर मूसलाधार बारिश की थी। उस वक्त भगवान श्रीकृष्ण ने छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत (Govardhan mountain) उठाकर बृजवासियों को बचाया था। पर्वत के नीचे भगवान श्रीकृष्ण ने सभी को सुरक्षा प्रदान की थी। तभी से भगवान श्रीकृष्ण को गोवर्धन के रूप में पूजा जाता है।

पूजा शुभ मुहूर्त-

हिंदू पंचांग के अनुसार, 5 नवंबर को रात 2 बजकर 44 मिनट पर शुरू होकर प्रतिपदा तिथि अगले दिन 11 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। गोवर्धन पूजा का शुभ समय सुबह 7 बजकर 59 मिनट से सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है।
गोवर्धन पूजा विधि-

1. सबसे पहले शरीर पर तेल से मालिश करें।
2. उसके बाद स्नान करें।
3. घर के मुख्य द्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं।
4. पर्वत के पास भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रखें।
5. अब विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।