शनि (Shani) को कर्मफल दाता और न्यायदेवता कहे जाते हैं। शनि कुंभ और मकर राशि के स्वामी हैं। यह जितनी कृपा बरसाते हैं उससे कई दोगुना तकलीफ भी देते हैं। सबसे धीमी चाल चलने वाले ग्रह शनि है। शनि (Shani) तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच के माने जाते हैं। शनि अपनी स्वराशि कुंभ में गोचर करने जा रहे हैं, जिससे कुंभ राशि वालों के लिए बहुत ही खराब वक्त रहेगा।



कुंभ (Aquarius) राशिवालों को समझदारी से काम लेना होगा। क्योंकि राशि पर शनिदेव का प्रभाव ज्यादा दिनों तक रहता है। ज्योतिष के मुताबिक कुंभ राशि पर शनि देव की कष्ट का दूसरा चरण शुरू होगा। 29 अप्रैल को शनि राशि (Shani Dev) परिवर्तन के साथ ही कुंभ राशि पर शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण शुरू होगा। इस चरण को शिखर चरण भी कहते हैं।

कहते हैं कि इस चरण में शनि की साढ़े साती अपने चरम पर होती है। इसे कष्टदायी माना जाता है। कुंभ राशि (Aquarius) वालों के अलावा कर्क व वृश्चिक राशि के जातकों को सावधान रहना होगा। इन दोनों राशियों से जुड़े लोगों पर शनि ढैय्या 12 जुलाई से प्रारंभ होगी।