गरुड़ पुराण 18 पुराणों में से एक प्रमुख माना जाता है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और गरुड़ पक्षी के बीच का संवाद है। इसमें कई तरह की बातें बताई गई है जो इंसानों के लिए हैं। गरुड़ पुराण के एक श्लोक मे बताया गया है कि दुनिया की कुछ चीजों को देखने से ही पुण्य की प्राप्ति है।

गोमूत्रं गोमयं दुन्धं गोधूलिं गोष्ठगोष्पदम्।
पक्कसस्यान्वितं क्षेत्रं द्ष्टा पुण्यं लभेद् ध्रुवम्।।


इस श्लोक का अर्थ हैं कि गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोधूली, गोशाला, गोखुर और पकी हुई खेती देखने से पुण्य प्राप्त होता है। माना जाता है कि गोमूत्र में मां गंगा का वास होता है। इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। गाय का गोबर शुभ माना जाता है। पूजा-अर्चना और मांगलिक कार्य में इस्तेमाल किया जाता है। गाय के दूध को अमृत समान माना जाता है। इससे कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

गरुड़ पुराण के मुताबिक जब कोई गाय जमीन को खुरचकर धूल निकालती है उसे गोधूली कहते हैं। गाय के पैरों से खुरची मिट्टी को शुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण में इसे देखने भर से पुण्य मिलता है। गौशाला भी मंदिर की तरह पूजनीय माना जाता है। गौसेवा से व्यक्ति को पुण्य मिलता है। गाय के पैरों को तीर्थ समान माना जाता है। गाय के पैरों को छुने से उस काम में सफलता हासिल होती है।