मां गंगा सबसे पाक और पवित्र मानी जाती है। गंगा इतनी शुद्ध है कि सालों साल इसका पानी खराब नहीं होता है। भगवान शिव शंकर की जटाओं से निकल इंसानों के दुख हरती है मां गंगा। गंगा सभी का उद्धार करने वाली हैं। उनकी कृपा से दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं। संकट से मुक्ति के लिए मां गंगा की उपासना बहुत मायने रखती है।गंगाजल का स्पर्श करने मात्र से कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।

गंगाजल से स्नान या इस पवित्र जल का सेवन करने से कई कई तरह की नकारात्मकता दूर हो जाती है। इसी तरह से रोगों का खतरा कम हो जाता है। गंगाजल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। वास्तु शास्त्र में गंगाजल के प्रयोग से कई दोषों को दूर करने के बारे में बताया गया है। रोजाना सोमवार भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा बनी रहती है।

घर में साफ-सफाई के बाद स्नान कर पूजा करें और गंगाजल का छिड़काव करें। गंगाजल प्रत्येक कमरे में छिड़कें। इससे मन शांत रहता है और घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है। मान्यता है कि गंगाजल के सेवन से निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर जैसी बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है। गंगाजल को घर में रखने से हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। कभी भी दूषित हाथों से गंगाजल को स्पर्श नहीं करना चाहिए। पवित्र गंगाजल को हमेशा तांबे या चांदी के बर्तन में रखना चाहिए।