मध्यप्रदेश का मांडू मशहूर पर्यटन स्थलों में तो शुमार है ही, साथ ही यहां का नीलकंठ महादेव मंदिर (Neelkanth Mahadev Temple) भी उतना ही मशहूर है। जितनी कि रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम की कहानी। जी हां, मंदिर में दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों के लोग तो आते ही हैं, साथ ही देश-विदेश के पर्यटक भी यहां दर्शन करने पहुंचते है। नीलकंठ महादेव से विदेशी पयर्टक भी मन्नत मांगते है।

नीलकंठ महादेव मंदिर, मांडू में विंध्याचल पर्वत श्रेणी पर स्थित मंडवगढ़ के किले में विराजित है। जो खाई के किनारे बना हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण अकबर के एक राज्यपाल ने सोलहवीं सदी में करवाया था। जिसका कोई प्रमाण नहीं है।

उनके बाद यह मंदिर लगातार आस्था का केंद्र बना रहा पर औरंगजेब के काल में मंदिर को एक बड़े अस्थकोणीय शीला से बंद कर दिया था। बाद में पेशवा काल 1732 में इसे फिर से खोल गया। तब से लेकर आज तक यह आस्था का केंद्र बना हुआ। प्रति वर्ष यहां कई उत्सव व अभिषेक किए जाते है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को 6-7 सीढिय़ां चढऩा पड़ती है। मंदिर के सामने एक बहुत ही सुंदर कुंड है और वहां की जल संरचनाएं बहुत ही बढिय़ा उदाहरण है।