सावन का महीना चल रहा है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इसका बहुत अधिक महत्व होता है। भोलेनाथ की इस माह में विधि-विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। भोलेनाथ की कृपा से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है और व्यक्ति का जीवन आनंद से भर जाता है। ज्योतिष के मुताबिक इस समय मकर, कुंभ, धनु, मिथुन और तुला राशि के जातकों पर शनिदेव का अशुभ प्रभाव है।

मकर, कुंभ, धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है और मिथुन, तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या की वजह से व्यक्ति का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है। भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से शनिदेव की पूजा की जाती है।
सावन के पहले शनिवार करें ये उपाय में सावन के माह में हर दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए। शनिवार के दिन भी शिवलिंग पर जल अर्पित करें और भोलेनाथ से प्रार्थना करें।
भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करें लिंगाष्टकम स्तोत्र पाठ-
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥1॥

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥2॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥3॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥4॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥5॥

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥6॥

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥7॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥8॥

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥