आज भी मौनी अमावस्या (Magh Amavasya) है कल सोमवार पर अमावस्या पड़ने पर सोमवती अमावस्या हुई और आज मंगलवार होने मंगल अमावस्या हैँ। इस साल मौनी अमावस्या पर भौमवती अमावस्या (Bhaumvati Amavasya) का दुर्लभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन शनिदेव और पितरों से संबंधित है। इस दिन माघ का दूसरा शाही स्नान होता है।  इस बार अमावस्या रही, जिससे सोमवार और मंगलवार दोनों स्नान-दान का पुण्य प्राप्त कर सकेंगे।

अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त-

31 जनवरी, सोमवर को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से अमावस्या तिथि प्रारंभ हो चुकी है, जो कि 1 फरवरी 2022, मंगलवार को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी।

मौनी अमावस्या (Magh Amavasya) महत्व-

इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने और कटु शब्दों को न बोलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है।  मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी या कुंड में स्नान करना शुभ फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ अमावस्या के दिन संगट तट और गंगा पर देवी-देवताओं का वास होता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग-

मौनी अमावस्या यानी 1 फरवरी को सुबह 06 बजकर 41 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सिद्धि योग को शुभ योग में गिना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है।
मौनी अमावस्या (Magh Amavasya) व्रत नियम-

1.  मौनी अमावस्या के दिन सुबह स्नान नदी, सरोवर या पवित्र कुंड में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
2.  इस दिन व्रत रखकर जहां तक संभव हो मौन रहना चाहिए। गरीब व भूखे व्यक्ति को भोजन अवश्य कराएं।
3.  अनाज, वस्त्र, तिल, आंवला, कंबल, पलंग, घी और गौ शाला में गाय के लिए भोजन का दान करें।
4.  यदि आप अमावस्या के दिन गौ दान, स्वर्ण दान या भूमि दान भी कर सकते हैं।
5.  हर अमावस्या की भांति माघ अमावस्या पर भी पितरों को याद करना चाहिए। इस दिन पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।