इस बार चैत्र नवरा​त्रि (Chaitra Navratri) 02 अप्रैल दिन शनिवार को शुरु हो रही है। इसी दिन कलश (Kalash) स्थापना या घटस्थापना की जाएगी। कलश स्थापना विधिपूर्वक किया जाता है। साथ ही कलश के साथ रखे मिट्टी में जौ बोते हैं। इस साल चैत्र नवरा​त्रि की घटस्थापना का मुहूर्त 02 अप्रैल को प्रात:काल में 6:10 से 8:31 बजे के बीच तक है। दोपहर में कलश स्थापना मुहूर्त 12:00 बजे से 12:50 बजे तक है। 

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सामग्री-

मिट्टी का कलश, कलश ढकने के लिए मिट्टी का एक ढक्कन, जौ बोने के लिए साफ और पवित्र मिट्टी, 1 सिक्का, सुपारी, अक्षत्, आम की पत्तियां, मौली, रक्षासूत्र, जौ, गंगाजल, साफ जल, फूल, माला, लाल रंग की चुनरी, दूर्वा घास आदि।

कलश स्थापना विधि

सबसे पहले एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालें, फिर उसमें जौ के दाने डालें। उस पर फिर मिट्टी डालें। उसके बाद उसमें इतना पानी डालें कि वह मिट्टी गिली हो जाए, जिसमें जौ आसानी से उगें। इस बात का ध्यान रखें कि जौ ऊपर की ओर निकलें।

अब मिट्टी के कलश के गर्दन पर रक्षासूत्र बांध दें और उस पर लाल रोली से तिलक करें। फिर गंगाजल कलश में डालें। फिर उसे साफ जल से भर दें।

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इसके पश्चात कलश के अंदर सिक्का, दूर्वा, अक्षत्, सुपारी आदि डालें।

अब कलश के मुख पर आम के 5 पत्ते रखें और उसे मिट्टी के ढक्कन से ढक दें।

इसके बाद एक सूखे नारियल में रक्षासूत्र या लाल चुनरी बांध दें।

अब आप कलश स्थापना के लिए सबसे पहले जौ वाले मिट्टी के बड़े पात्र को पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। अब उसके ऊपर कलश को स्थापित करें। फिर सबसे ऊपर कलश के ढक्कन पर नारियल रख दें।

अब आप वरुण देव, गणेश जी और मां दुर्गा की आह्वान करें। उसके बाद नवरात्रि की पूजा प्रारंभ करें। इस प्रकार से नवरात्रि की कलश स्थापना पूर्ण हो गई।

चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों तक इस कलश को पूजा स्थान पर रहने दें। प्रत्येक दिन उसमें उचित मात्रा में पानी डालते रहें।