आज शनिवार हैं और आज का दिन शनि देव को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। हर माह में एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है। साल में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इनकी कृपा से व्यक्ति को सभी तरह के सुखों का अनुभव होता है।
पूजा सामग्री-

 पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।
व्रत पूजा

  •     सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
  •     स्नान करने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
  •     घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  •     अगर संभव है तो व्रत करें।
  •     भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें।
  •     भगवान भोलेनाथ को पुष्प अर्पित करें।
  •     इस दिन भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
  •     भगवान शिव को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
  •     भगवान शिव की आरती करें।
  •     इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।