न्याय के देवता शनिदेव अगर किसी व्यक्ति पर मेहरबान होते हैं, तो उसे हर सुख-सुविधा से पूर्ण कर देते हैं लेकिन अगर शनिदेव नाराज हो जाते हैं तो जीवन नर्क बन जाती है। व्यक्ति को जीवन में एक बार शनि की महादशा, ढैय्या और साढ़े साती का सामना जरूर करना पड़ता है। शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करते हैं ताकि शनिदेव की कृपा बनी रहे।


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कई बार पूजा के दौरान भी नसमझी में कुछ ऐसी चीजें कर जाते हैं, जो शनिदेव की प्रसन्न करने की जगह नाराज कर देती हैं और फिर उनकी कोप का शिकार बनना  पड़ता है। शनिदेव की पूजा करते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि उनकी आंखों में देखकर पूजा न करें। ऐसे में पूजा के समय या तो अपनी आंखें बंद कर लें या फिर उनके चरणों की तरफ देखकर पूजा करें।


शनिदेव की पूजा के दौरान तनकर न खड़े हों। साथ ही, पूजा के बाद जब वहां से हटते हैं, तो उसी अवस्था में हटें , जैसे खड़े हैं. शनिदेव को पीठ नहीं दिखानी चाहिए। इससे वे नाराज हो जाते हैं।


शनिवार के दिन शनिदेव की मूर्ति पर सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। ऐसे में लोग कई बार तांबे के बर्तन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इस दौरान लोहे के बर्तन का इस्तेमाल करना चाहिए। तांबा सूर्य का कारक है।