कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) कहा जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन ही सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) चार महीने बाद नींद से जागते हैं और भगवान शालीग्राम के अवतार में माता तुलसी के साथ विवाह (Tulsi Vivah) कराया जाता है।

आज तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) हैं और इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। देवउठनी एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना भी अनिवार्य होता है।

ये कार्य ना करें

1. तुलसी के पत्ते न तोड़े (Tulsi leaves)- देवउठनी एकादशी के दिन प्रभु शालीग्राम और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है। ऐसे में इस दिन भूलकर भी तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए।
2. तामसिक चीजों का सेवन न करें (tamasic things)- एकादशी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर आप व्रत नहीं रख रहे हैं तो इस दिन साधारण भोजन करना चाहिए। इस दिन मांस-मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

3. चावल का सेवन न करें (Rice)- एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि चावल का सेवन करने से व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि पाता है।