चैत्र नवरात्रि शुरू होने में सिर्फ दो दिन बाकी रह गए हैं। इस वर्ष 2021 में मंगलवार, 13 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। जिन भक्‍तों के ह्दय में मां दुर्गा के लिए अपार श्रद्धा और भक्ति है और जो पूरे मन- प्राण से मां दुर्गा की आराधना करते हैं, वो इस चैत्र नवरात्रि के महत्‍व को बखूबी समझते हैं। पूरी सच्‍ची श्रद्धा से आराधना करने वाले भक्‍तों की मां दुर्गा सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

लेकिन ध्‍यान रहे कि सिर्फ मन में श्रद्धा होना ही काफी नहीं है। इसके लिए आपको बाहरी कुछ चीजों का भी ध्‍यान रखने और पूरे अनुशासन के साथ पालन करने की जरूरत है। 

किसी भी काम को शुरू करने से पूर्व मन और आत्‍मा का शुद्धिकरण बहुत जरूरी हैं। यदि आप नौ दिनों का व्रत रखते हैं और सभी विधि नियमों का पालन करते हुए मां दुर्गा की पूजा करते हैं, लेकिन आपका मन और आत्‍मा शुद्ध नहीं है, आपको चिंताओं ने घेर रखा है, आपके मन में कलुष, विद्वेष और अनेक प्रकार के नकारात्‍मक विचार हैं तो मां दुर्गा तक आपकी आराधना पहुंचेगी ही नहीं।

इसलिए मन की शुद्धि और पवित्रता सबसे ज्‍यादा जरूरी है। चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ से पहले अपने मन के समस्‍त क्‍लेश साफ कर लें और मां से नकारात्‍मक भावनाओं के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद एकदम पवित्र और शुद्ध अंत:करण से चैत्र नवरात्रि में मां के स्‍वागत की तैयारियां प्रारंभ करें।

जैसे हम दीवापली के पहले घर की साफ-सफाई का विशेष ख्‍याल रखते हैं, उसी प्रकार चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होने से पहले घर की सफाई कर लेना बहुत जरूरी है। और ये सफाई वो रोजमर्रा वाली सफाई नहीं है। इस पूरे नौ दिन आपके घर का प्रत्‍येक कोना बिल्‍कुल साफ, स्‍वच्‍छ होना चाहिए। घर के किसी भी कोने में तनिक भी गंदगी नहीं होनी चाहिए।

आपने घर के जिस सबसे पवित्र कोने को घटस्‍थापना के लिए चुना है, उस जगह को पहले पवित्र गंगाजल से साफ करें और फिर नर्म कपड़े से पोंछकर उस जगह को पूरी तरह पवित्र कर लें। ये करने से पहले स्‍वयं भी स्‍नान करना न भूलें। घटस्‍थापना के लिए ईशान कोण सबसे उचित माना जाता है। अंत: ये सारी तैयारियां पूर्ण करने के बाद ईशान कोण में संपर्ण विधि विधान से घटस्‍थापना करें।

यह तो आप जानते ही हैं कि हिंदू धर्म में स्‍वास्तिक के निशान का क्‍या महत्‍व है। यह बहुत शुभ और मंगलकारी है। इसलिए घर को पवित्र करने के बाद घटस्‍थापना से पूर्व घर के मुख्‍य द्वार पर स्‍वास्तिक का निशान बनाएं। ध्‍यान रखें कि पूरे नौ दिनों तक मुख्‍यद्वार पर ये निशान बना रहे।