चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ हो गया है। आज पहला नवरात्रि है। मां दुर्गा धरती पर रहने के लिए पधार रही है। मां दुर्गा की आराधना का सबसे बड़ा पर्व होता है। मां दुर्गा सिर्फ धरती पर नौ दिनों तक ही निवास करती है और दसवें दिन मां अपने घर को निकल जाती है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक वर्ष 5 नवरात्रि आती हैं।


चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण होती है। चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ मंगलवार से हो रहा है और इसकी समाप्ति 21 अप्रैल बुधवार होगी। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का बहुत महत्व होता है। शुभ मुहूर्तानुसार भक्तजन पूरे विधि-विधान से कलश स्थापना या घटस्थापना करते हैं और मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करते हैं।


चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 05:58 से 10:14 तक हैं। यह स्थापना सिर्फ 4 घंटे 15 मिनट की है। कलश को शास्त्रों में भगवान गणेश की संज्ञा दी गई है। यही कारण है कि कलश स्थापना पूजा शुभ मुहूर्त अनुसार, पूरे विधि-विधान के साथ ही संपन्न किया जाता है। कुछ भी कार्य करने से पहले भगवान गणेश जी को याद किया जाता है। शुभ काम में गणेश जी पूजा की जाती है।

मां शैलपुत्री की शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप होता है। पर्वत राज हिमालय की पुत्री होने के कारण, मां के इस रूप का नाम शैलपुत्री रखा गया है। उनका वाहन वृषभ होने के कारण, शैलपुत्री को देवी वृषारूढ़ा नाम से भी जाना जाता है। मां शैलपुत्री के रूप की बात करें तो, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है।