मां भवानी की अराधना का विशेष पर्व 13 अप्रैल से शुरू हो गया है। इसी के साथ नव विक्रमी संवत्सर 2078 का भी प्रारंभ होगा। देवी भगवती कई विशिष्ट योग-संयोग के साथ अश्व पर सवार पर सवार होकर आएंगी। नवसंवत्सर के राजा और मंत्री मंगल होंगे। चैत्र नवरात्रि को ही सृष्टि प्रारंभ माना गया है। सृष्टि इससे पहले शक्तिविहीन थी। नवरात्रि में उसमें अनेकानेक शक्ति का संचार हुआ। इसलिए चैत्र नवरात्रि प्रमुख शक्ति पर्व है। 

अष्टमी और नवमी पूजन-

सोमवार, 19 अप्रैल को सप्तमी तिथि मध्य रात्रि 12 बजकर 01 मिनट तक है। इसके बाद अष्टमी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। 21 अप्रैल को नवमी है। नवमी भी मध्यरात्रि 12 बजकर 35 मिनट तक है। इसलिए अष्टमी व नवमी दोनों ही दिन व्रत पारण और कन्या पूजन के लिए पर्याप्त मिल रहे हैं।  रामनवमी का पूजन दोपहर 12 बजे होता है। इसलिए इससे पहले देवी नवमी का पूजन कर लें। पहले शक्ति अराधना होगी और फिर रामनवमी।

अष्टमी तिथि पर बन रहे ये पूजा के शुभ मुहूर्त-

- ब्रह्म मुहूर्त- 04:11 ए एम, अप्रैल 21 से 04:55 ए एम, अप्रैल 21 तक।

- अभिजित मुहूर्त- 11:42 ए एम से 12:33 पी एम तक।

- विजय मुहूर्त- 02:17 पी एम से 03:08 पी एम तक।

- गोधूलि मुहूर्त- 06:22 पी एम से 06:46 पी एम तक।

- अमृत काल- 01:17 ए एम, अप्रैल 21 से 02:58 ए एम, अप्रैल 21 तक।

रामनवमी के दिन बनने वाले शुभ मुहूर्त-

- ब्रह्म मुहूर्त- 04:10 ए एम, अप्रैल 22 से 04:54 ए एम, अप्रैल 22 तक।

- विजय मुहूर्त- 02:17 पी एम से 03:09 पी एम तक।

- गोधूलि मुहूर्त- 06:22 पी एम से 06:46 पी एम तक।

- रवि योग- 07:59 ए एम से 05:39 ए एम, अप्रैल 22 तक।

- निशिता मुहूर्त- 11:45 पी एम से 12:29 ए एम, अप्रैल 22 तक।