दीपावली (Deepawali) के पंचमहापर्वों में भाईदूज (Bhaidooj) पांचवां प्रमुख त्योहार है। यह पावन पर्व भाई-बहन के प्रेम और स्नेह से जुड़ा है। इस दिन बहनें अपने प्रिय भाइयों के लिए लंबी आयु और आरोग्य की कामना करते हुए भाई के माथे पर सौभाग्य दिलाने वाला टीका लगाती हैं। वहीं भाई अपने बहनों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हुए उपहार देता है।

कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया के दिन देश भर में मनाया जाने वाला भाई दूज का पर्व अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसे भाई बीज के नाम से तो वहीं मणिपुर में निंगोल चकबा के रूप में मनाया जाता है। पड़ोसी देश नेपाल में इसे भाई टीका कहते हैं। नाम भले ही अलग-अलग हो लेकिन कामना और भावना एक ही होती है।

भाई दूज के दिन बहनें भाई को तिलक करके मिठाई खिलाती हैं। मान्यता है कि बहन के हाथों बना खाना या मिठाई खाने से भाई की सारी विपदाएं दूर होती हैं और आयु बढ़ती है। ऐसे में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भाईदूज के दिन भाईयों को बहन के घर भोजन करने अवश्य जाना चाहिए फिर बहन चाहे चचेरी, ममेरी अथवा मुंहबोली ही क्यों न हो। यदि किसी की कोई बहन न हो तो वह गाय, नदी आदि का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठकर भोजन करे तो भी उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है।

भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन यमराज जी के पूजन का विशेष विधान है। इस दिन 'धर्मराज नमस्तुभ्यं समस्ते यमुनाग्रज। पाहि मां किंकरैः सार्धं सूर्यपुत्र नमोऽस्तु ते।' मंत्र से यमराज जी की और 'यमस्वसर्नमस्तेऽस्तु यमुने लोकपूजिते। वरदा भव मे नित्यं सूर्यपुत्रि नमोऽस्तु ते।' मंत्र से यमुना जी की साधना करनी चाहिए।

मान्यता है कि भाई दूज के दिन भाई-बहनों को यमुना में स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि यदि इस दिन यमुना नदी में भाई-बहन साथ में स्नान करें तो यमुना जी की कृपा से भाई की तमाम तरह की आपदाओं से रक्षा होती है और उसका यम भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं। भाई दूज के दिन बहनें बेरी पूजन भी करती है और भाईयों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।