प्राचीन भगवान वेंकेटेश्वर मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने बुधवार रामनवमी को घोषणा की कि भगवान हनुमान की जन्मस्थली अंजनाद्रि है।  यह स्थान मंदिर से उत्तर दिशा में करीब पांच किलोमीटर दूर जपाली तीर्थम में एक पहाड़ी है।  टीटीडी द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्वालय के कुलपति प्रो. मुरलीधर शर्मा की अगुवाई में गठित की गयी विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों की एक समिति ने यहां तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित की उपस्थिति में रामनवमी के अवसर पर यह घोषणा की। 

टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी के एस जवाहर रेड्डी और अवर कार्यकारी अधिकारी ए वी धर्मा रेड्डी भी इस अवसर पर मौजूद थे।  टीटीडी के एक अधिकारी के एक अनुसार समिति ने कहा कि अंजनाद्रि भगवान हनुमान की जन्मस्थली है, जो दक्षिण भारत में श्री आंजनेय स्वामी के नाम से लोकप्रिय है। 

उत्कीर्णलेख, वैज्ञानिक एवं पौराणिक साक्ष्यों के आधार पर तिरुमाला में सात पहाडिय़ों में एक को भगवान हनुमान की जन्मस्थली बताने वाली एक पुस्तिका भी शर्मा ने इस मौके पर जारी की।  शर्मा ने कहा कि समिति ने प्राचीन साहित्य, अभिलेख, एतिहासिक एवं खगोलीय गणना के आधार पर महत्वपूर्ण साक्ष्यों को एकत्र किया। 

टीटीडी के एक अधिकारी के अनुसार इस पुस्तिका को टीटीडी वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा।  अधिकारी के अनुसार पुरोहित ने समिति के प्रयासों की सराहना की और अंजनाद्रि को श्री हनुमान की जन्मस्थली होने बात स्थापित करने संबंधी उसकी रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त किया। 

भगवान हनुमान के जन्मस्थान के विषय पर टीटीडी से दावे से कर्नाटक में धार्मिक, पुरातात्विक एवं राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि बेल्लारी के समीप हंपी को सदियों से कपियों का साम्राज्य अर्थात 'किष्किंधा साम्राज्य' समझा जाता रहा है।  कुछ पुरातत्वविदों एवं इतिहासवेत्ताओं ने टीटीडी के दावे को खारिज कर दिया है।  विश्व हिंदू परिषद की कर्नाटक इकाई ने भी कहा कि टीटीडी को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले और समय लेना चाहिए एवं विद्वानों तथा धार्मिक प्रमुखों के साथ विचार विमर्श करना चाहिए था।