आज भारत का केंद्रिय बजट पेश हो रहा है, लेकिन इस बार भी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ब्रीफकेस में बजट की बजाए बहीखाता ही लेकर आई हैं। इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वो ऐसा क्यों करती है। ऐसा दूसरी बाहर हुआ है जब वित्तमंत्री ब्रीफकेस में बजट की बजाए बहीखाता लेकर आई हैं। आज भी जब वित्त मंत्रालय के बाहर अपनी टीम के साथ आईं तो उनके हाथ में फिर से लाल कपड़े में बंधा बहीखाता दिखा। 

बजट की बजाए एबहीखाते का चलन

निर्मला सीतारमण बहीखाते का चलन लेकर आई है। वह जब वित्त मंत्री बनीं तो वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पहला बजट पेश किया। उस वक्त उन्होंने बजट की जगह बहीखाता लाकर लोगों को चौंका दिया।  सीतारमण ने अपना पहला बजट पेश करते हुए बजट दस्तावेज सूटकेस या ब्रीफकेस में लाने के बजाय लाल कपड़े से बने बस्ते में लाकर सभी का ध्यान खींचा था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, 'सूटकेस, ब्रीफकेस मुझे पसंद नहीं आता। यह अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है। हमें यह पसंद नहीं। फिर मेरी मामी ने मुझे लाल कपड़े का बस्ता बनाकर दिया। उन्होंने पूजा-अर्चना करने के बाद मुझे यह लाल बस्ता दिया। यह घर का थैला नहीं लगे, इसलिए सरकारी पहचान देने के लिए उस पर अशोक स्तंभ का चिन्ह लगाया गया।'

बजट को ब्रीफकेस में लाने का चलन था

वित्त वर्ष 2019-20 से पहले तक बजट प्रपत्र को ब्रिफकेस में लाए जाने का चलन था। सीतारमण के वित्त मंत्री बनने से पहले तक ब्रिफकेस में ही बजट प्रपत्र लाया जाता था। 

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