बजट 2020 किसानों को निराश करने वाला हो सकता है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-किसान) का बजट 20 फीसदी तक कम सकती है। कृषि मंत्रालय ने इस योजना के तहत किसानों को पैसे देने के लिए 60,000 करोड़ रुपये की मांग की है। इस योजना के लिए जबकि 2019-20 के बजट में 75,000 करोड़ रुपये आवंटन करना तय किया गया था।

माना जा रहा है कि संभावित लाभार्थियों की संख्या को ध्यान में रखकर अगले वित्त वर्ष के लिए बजट आवंटित किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा डेटाबेस और संभावित लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए वाजिब बजट की मांग की गई है। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है और सरकार ने अभी तक इस संबंध में 44,000 करोड़ रुपये वितरित किए हैं।

पीएम किसान योजना के तहत देश में लगभग 9.5 करोड़ किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें से करीब 7.5 करोड़ किसानों का आधार के जरिए सत्यापन हो चुका है। इसलिए राज्यों पर सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए दबाव डाला जा  रहा है जिससे इस वित्त वर्ष के अंत और अधिक राशि दी जा सके।

सरकार ने पिछले साल फरवरी में यह योजना शुरू की थी। इसमें 2 हेक्टेयर तक जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को शामिल किया गया था। पिछले वित्त वर्ष में इस योजना को 20,000 करोड़ रुपये दिए गए थे, जिसमें से 6,000 करोड़ रुपये से अधिक रकम का वितरण हुआ था।

बड़े किसानों को भी योजना में शामिल किया गया

मई में दोबारा सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने योजना के नियमों में ढील दी और इसमें बड़े किसानों को भी शामिल किया गया। हालांकि अधिक आय वाले किसान अभी इस योजना से बाहर हैं। 2019-20 के बजट में इस योजना को 75,000 करोड़ मिले थे।

सरकार के अनुमान के मुताबिक, देश में करीब 14.5 करोड़ किसान हैं। यह अनुमान 2015 में हुई कृषि जनगणना पर आधारित है। अधिकारी ने बताया, 'लाभार्थियों के सत्यापन के लिए हम राज्य सरकारों पर निर्भर हैं। सत्यापन के बाद ही हम किसानों के खाते में पैसे ट्रांसफर करते हैं। राज्य सत्यापन प्रक्रिया में तेजी नहीं दिखा रहे हैं, इसके चलते हम इसमें थोड़ा पीछे चल रहे हैं।'

जानकारों के अनुसार कृषि सेक्टर को इस योजना से लाभ मिला है। नेशनल अकेडमी ऑफ ऐग्रिकल्चर साइंसेज के फेलो पी के जोशी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में किसानों ने अतिरिक्त पैसों का इस्तेमाल अधिक इनपुट खरीदने में किया है। उन्होंने बताया, 'हमने एक स्टडी की थी। इसमें हमने पाया कि PM-किसान के तहत जब बुआई सीजन से पहले पैसों का वितरण किया गया तो किसानों ने इसका इस्तेमाल कीटनाशक और उर्वरक खरीदने में किया। यह अच्छी योजना है। हालांकि इसकी सफलता इस पर निर्भर करती है कि वितरण कब किया जाता है। अगर इसका वितरण खेती के सीजन में नहीं होता है, तो किसान इसका इस्तेमाल कहीं और करते हैं।' 

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