फाल्गुन हिन्दू पंचांग का अंतिम माह है। इस माह को रंग, तरंग और उमंग का महीना कहा जाता हैं। कामदेव के भस्म होने की घटना फाल्गुन माह में ही घटित हुई थी। फाल्गुन के देवता भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव दोनों ही हैं। इस महीने रंगीन और सुंदर वस्त्र धारण करना चाहिए। इस माह नियमित रूप से भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करनी चाहिए। उन्हें गुलाल अर्पित करें। 

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कहा जाता है कि अगर अवसाद से परेशान हैं तो इस माह जल में चंदन मिलाकर स्नान करें। स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो पूरे माह भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करें। आर्थिक समस्या है तो इस माह मां लक्ष्मी को गुलाब या इत्र अर्पित करें। फाल्गुन माह में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी है। इस माह भगवान श्रीकृष्ण के बाल, युवा और गुरु इन तीनों स्वरूपों की उपासना करने का विधान है। 

संतान प्राप्ति की कामना के लिए इस माह भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। प्रेम और आनंद प्राप्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण के युवा स्वरूप की पूजा की जाती है। ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करें। इस माह को बसंत ऋतु का माह भी कहा जाता है। इस माह में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस माह भगवान शिव, भगवान विष्णु एवं चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। 

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फाल्गुन मास में होली, महाशिवरात्रि, फुलेरा दूज, फाल्गुन पूर्णिमा, फाल्गुन अमावस्या और आमलकी एकादशी आदि त्योहार मनाए जाते हैं। इस माह अपने आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शीतल जल से स्नान करना चाहिए। इस माह अनाज का प्रयोग कम से कम करें। भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करते समय फूलों का उपयोग अधिक करना चाहिए। फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन देवताओं को अबीर और गुलाल अर्पित करना चाहिए। आर्थिक एवं दांपत्य सुख-समृद्धि के लिए माता पार्वती एवं मां लक्ष्मी की उपासना करनी चाहिए।