दिवाली (Diwali 2021) का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन दिवाली के साथ साथ  एक त्योहार मनाया जाता है, वो त्योहार नर्क चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) जो दिवाली के दिन मनाया जाता है।

जानकारी के लिए बता दें कि इस त्योहार का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है जो दिवाली के रूप में जाना जाता है। दिवाली (Diwali) के दौरान लोग एक साथ प्रकाश के दीये और मीठे व्यंजनों का स्वाद लेने और भगवान से प्रार्थना करने के लिए एक साथ आते हैं। इस दिन की विभिन्न मूल कहानियां हैं जिनमें से मुख्य हैं बुराई पर अच्छाई की जीत।

जहां उत्तर भगवान राम और देवी सीता की अयोध्या वापसी का जश्न मनाता है, वहीं इस दिन नरक चतुर्दशी  भी मनाई जाती है। बता दें, यह त्योहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा (Narak Chaturdashi) के नाम से भी प्रसिद्ध है।


बता दें कि जिस दिन श्रीकृष्ण (Shri Krishna) ने भौमासुर (Bhaumasur) का वध किया था उस दिन कार्तिक माह क चतुर्दशी थी इसलिए उसे नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi भी कहा जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण ने भौमासुर अर्थात नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से लगभग 16 हजार महिलाओं को मुक्त कराया था। इसी खुशी के कारण दीप जलाकर उत्सव मनाया जाता है।

पूजा विधि-


इस दिन यम की पूजा की जाए तो अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है।
इसीलिए इस दिन घर के मुख्य द्वार के बांई ओर अनाज की ढेरी रखें।
इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाना चाहिए लेकिन दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर कर दें।