हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। कोई भी शुभ, मांगलिक कार्य व पूजा-पाठ में चावल या अक्षत व तिलक के बिना अधूरी मानी जाती है। हिंदू धर्म में पूजा के दौरान चावल या अक्षत चढ़ाने की परंपरा काफी पुरानी है। हिंदू पुराण में पूजा में चावल चढ़ाने का उल्लेख मिलता है। 

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हिंदू धर्म में हर देवी देवताओं को चावल चढ़ाने की परंपरा है। पूजा के दौरान अक्षत के बाद चावल चढ़ाना महत्वपूर्ण व शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके बिना पूजा अधूरी होती है। अक्षत व चावल को हिंदू धर्म में सबसे शुभ माना गया है। चावल सबसे शुद्ध अनाज होता है। आइए जानते हैं चावल को पीले कैसे करें व पूजा के दौरान पीली चावल शामिल करने पर ध्यान देने योग्य बातें।

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जानिए कैसे करें चावल को पीला

चावल को पीला करने के लिए हल्दी का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए आप थोड़ी सी हल्दी लेकर इसमें थोड़ा पानी डालें। अब गिली हल्दी में चावल के दाने डालें। इसके बाद अच्छे से चावल को हल्दी में रंगने दें। जब चावल पूरी तरह रंग जाएं, तो इन्हें सूखने दें। इस तरह चावल पीले हो जाएंगे और इसका इस्तेमाल पूजा में किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पीले चावल से देवी-देवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है। देवी देवताओं को किसी भी कार्य में निमंत्रण देने के लिए पीले चावल का इस्तेमाल किया जाता है। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है।

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इन बातों का रखें ध्यान

चावल को सभी अन्य में सबसे श्रेष्ठ और शुद्ध माना गया है। सफेद चावल का रंग शांति का प्रतीक होता है। चावल को सबसे पहला अन्न माना जाता है, क्योंकि धरती पर सबसे पहले चावल की खेती हुई थी। अक्षत यानि चावल सभी देवी देवताओं को चढ़ाया जाता है। सनातन धर्म में अक्षत या पीली चावल के बिना कोई भी शुभ कार्य संपन्न नहीं होता है। ध्यान रखें कि कोई भी अक्षत या पीली चावल चढ़ाते समय टूटा हुआ न हो। टूटा हुआ चावल अशुभ माना जाता है।