हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के दोनों पक्ष यानी शुक्ल व कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि गणेश जी को समर्पित होती है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी या वरद चतुर्थी कहा जाता है। वरद चतुर्थी आज यानी 4 मई 2020, बुधवार को है। 

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इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन विघ्नहर्ता की विधिवत पूजा करने से जातक को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और मनोकामना पूरी होती है। जानें वरद चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजा विधि-

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वरद चतुर्थी 2022 शुभ मुहूर्त-

चतुर्थी तिथि 04 मई को सुबह 07 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी, जो कि 5 मई को सुबह 10 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगी। चंद्रोदय 04 मई को सुबह 08 बजकर 07 मिनट पर और चंद्रास्त 04 मई को रात 10 बजकर 11 मिनट पर होगा।

विनायक चतुर्थी पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।

इसके बाद घर के मंदिर में सफाई कर दीप प्रज्वलित करें।

दीप प्रज्वलित करने के बाद भगवान गणेश का गंगा जल से जलाभिषेक करें।

इसके बाद भगवान गणेश को साफ वस्त्र पहनाएं।

भगवान गणेश को सिंदूर का तिलक लगाएं और दूर्वा अर्पित करें।

भगवान गणेश को दूर्वा अतिप्रिय होता है। जो भी व्यक्ति भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करता है, भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। 

भगवान गणेश की आरती करें और भोग लगाएं। आप गणेश जी को मोदक, लड्डूओं का भोग लगा सकते हैं। 

इस पावन दिन भगवान गणेश का अधिक से अधिक ध्यान करें। 

अगर आप व्रत रख सकते हैं तो इस दिन व्रत रखें।

विनायक चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट

भगवान गणेश की प्रतिमा

लाल कपड़ा

जनेऊ

कलश

नारियल

पंचामृत

पंचमेवा

गंगाजल

रोली

मौली लाल