अभी पितृ पक्ष श्राद्ध चल रहे हैं। आज 5वां श्राद्ध हैं। इन दिनों पितर धरती पर आते हैं और अपने परिजनों से मिलते हैं। इस समय के दौरान पितरों की पूजा-पाठ और तर्पण किया जाता है। आपको बता दें कि गायत्री जाप, ईश वंदना एवं देव मंदिर तथा तुलसी चौरा होगा, वहां इनका आगमन नहीं होता। जब कभी इस योनि का प्रभाव जीवित व्यक्तियों पर पड़ता है तो उसे कई प्रकार का कष्ट होने लगता है।

पितृदोष के लक्षण

पितृदोष होने से घर में निरंतर बीमारी का आगमन, वंश में रूकावट, संतान का जन्म लेने के साथ मृत्यु, मानसिक अशांति, व्यापार में घाटा, विवाह में अवरोध, आकस्मिक दुर्घटना, घर में परिजनों को बराबर बुरा एवं डरावना सपना आना, कुछ भी इच्छित न होना, बने काम बिगड़ जाना आदि पितृदोष के लक्षण हैं जिसका निवारण कर लेना लाजिमी होता है।
उपाय

  • जब पितरों को पितृलोक में उचित स्थान मिल जाता है तो वे प्रसन्न होकर अपने परिजनों को खूब आशीर्वाद देते हैं।
  • घर के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
  • पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखना ही श्राद्ध है।
  • तर्पण, भोजन, पिण्डदान और वस्त्रदान व दक्षिणा श्राद्ध के चार अंग होते हैं।
  • पितृदोष एवं पूर्वजन्म के पापों से मुक्ति के लिए राहुकाल में शिवपूजन अवश्य करनी चाहिए।
  • प्रत्येक अमावस्या पर पितरों का नाम लेकर तर्पण अवश्य करें।
  • पितृदोष निवारक कवच धारण करना भी एक उपाय है।
  • पितृदोष से मुक्ति के लिए गया तीर्थधाम में मृतजनों का पिण्डदान कराना सबसे लाभदायी होता है।
  • भगवान राम ने भी गयाधाम के फल्गु नदी तट पर अपने पिता महाराज दशरथ का तर्पण और श्राद्ध किया था।