मां गंगा का अवतरण-महाराजा सगर ने विश्व विजय की कामना से अश्वमेध यज्ञ किया यज्ञ के घोड़े की रक्षा के लिये राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े के साथ थे इन्द्र किसी भी तरह इस कार्य मॆ विघ्न डालना चाहता था इन्द्र ने यज्ञ के घोड़े को तपस्यारत  कपिल मुनि के आश्रम मॆ लाकर छिपा दिया सगर के पुत्रों ने समझा की कपिल मुनि ने घोड़े को बंदी बनाकर हमे चुनौती दी है।

 फलस्वरूप उन्होने कपिल मुनि की तपस्या भंग कर दी। कपिल मुनि ने क्रोध कर सभी सगर पुत्रों को भस्म कर दिया। इन सभी मृत आत्माओ की मुक्ति के लिये किसी पवित्र नदी की  आवश्यकता थी क्योंकि उस समय अगस्त ऋषि ने सभी तरह के जल के पानी को सोख लिया था.सगर और अंशुमान और दिलीप ने मां गंगा को धरती मॆ लाने के लिये घोर तप किया लेकिन वे असफल रहे भगीरथ की तपस्या से गंगा जी का अवतरण धरती मॆ हुआ जिससे उनके पुरखों को मोक्ष हुआ साथ ही म्रत्युलोक वासियों को गंगा जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। 

गंगा पूजन कैसे करे-इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी या फ़िर घर मॆ स्नान के जल मॆ गंगा या पवित्र जल मिलाकर इस मंत्र का पाठ करना चाहिये। 

ॐ नमह शिवाये नारायनये दशहराये गंगाये नमह का जाप दस बार करना चाहिए  इसके पश्चात हाथ मॆ पुष्प लेकर इस स्त्रौत का पाठ करना चाहिये ॐ नमो भगवते ऐइम ह्री श्री हिली हिली मिली मिली गंगे मां पावय पावय स्वाहा  इस मंत्र का पांच बार उच्चरण  कर पुष्प जल को अर्पण करना चाहिये साथ ही अपने पितरों की तृप्ति के लिये प्रार्थना करना चाहिये.स्नान के समय दस दीपों का दान करना चाहिये नदी मॆ दस डुबकी लगाना चाहिये.जौ और तिल सोलह मुट्ठी लेकर तर्पण कार्य करना चाहिये इस दिन किया गय़ा कार्य पितरों को मोक्ष तथा वंशवृद्धि के लिये अति उत्तम होता है।