बाइस फरवरी से देव गुरु बृहस्पति अस्त हो जाएंगे और तेईस मार्च को उदय होंगे। इस दौरान सभी धार्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रम बंद रहेंगे। विवाह के मुहूर्त फुलहरा दोज (चार मार्च) को छोड़ पंद्रह अप्रैल से ही आरंभ होंगे।

 बृहस्पति ग्रह ज्ञान, गुरु, धर्म, विवाह, संतान, वृद्धि के कारक हैं। धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। यह 22 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 48 मिनट पर कुंभ राशि में अस्त हो जाएंगे। 23 मार्च की दोपहर एक बजकर 26 मिनट पर इसी राशि में उदय होंगे। इसके बाद ही मांगलिक कार्यक्रम आरंभ हो सकेंगे। विवाह के मुहूर्त 15 अप्रैल से ही आरंभ हो सकेंगे। 

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 बृहस्पति ग्रह 27 नक्षत्रों में से पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के भी स्वामी हैं। इन्हें मांगलिक एवं शुभ कार्यों का भी कारक माना जाता है। इसीलिए इनके अस्त होने पर शुभ एवं मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। अब 23 मार्च के बाद ही मांगलिक कार्य अैर 15 अप्रैल के बाद ही विवाह के मुहूर्त आरंभ हो सकेंगे।

गुरु व शुक्र तारा अस्त होने के कारण मांगलिक कार्य नहीं होंगे। सोमवार 21 फरवरी सुबह 8 बजकर 50 मिनट से गुरु वार्धक्य शरू होगा। गुरुवार 24 फरवरी सुबह 08 बजकर 50 मिनट पर गुरु तारा पश्चिम में अस्त होगा और अगले माह यानी 26 मार्च शनिवार शाम 06 बजकर 38 मिनट पर गुरु पूर्व में उदय होगा। विवाह एवं मांगलिक कार्यों के लिए गुरु और शुक्र तारा का उदय होना एवं शुभ मुहूर्त का होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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गुरु एवं शुक्र अस्त के इन दिनों में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, शपथ ग्रहण करना। शिलान्यास, व्रत उद्यापन, यगोपवीत संस्कार आदि शुभ मांगलिक कार्य करना पूर्णतः वर्जित है। गुरु और शुक्र तारा अस्त के दौरान बालक के जन्म लेने के बाद के सूतक आदि संस्कार, नामकरण, पूजन-हवन, गण्डमूल शांति, सगाई समेत भूमि, वाहन, ज्वेलरी आदि की खरीद-फरोख्त की जा सकती है। 

इस साल होलाष्‍टक 10 मार्च शुरू होगा जो 17 मार्च 2022 को खत्‍म होंगे। तब तक कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य सम्पन्न नहीं होंगे। सूर्य देव जब भी गुरु की राशि में गोचर करते हैं तभ भी शुभ व मांगलिक कार्यों में रोक लग जाती है। 14 मार्च से सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे, जिसके कारण भी एक माह शुभ कार्यों में रोक लग जाएगी। सूर्य का मीन गोचर में कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य सम्पन्न नहीं करना चाहिए।