भाई दूज (Bhai Dooj) की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार धर्मराज यम (Dharmaraja Yama) और यमुना (Yamuna) भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संध्या की संतान थे। लेकिन संध्या देवी भगवान सूर्य के तेज को सहन न कर पाने के कारण अपनी संतानों को छोड़ कर मायके चली गईं। अपनी जगह अपनी प्रतिकृति छाया (Chhaya) को भगवान सूर्य के पास छोड़ गई थी।
यमराज (Yamraj) और यमुना (Yamuna) छाया की संतान न होने के कारण मां के प्यार से वंचित रहते थे, लेकिन दोनों ही भाई बहन में आपस में खूब प्यार था। शादी होने बाद धर्मराज (Dharmaraja) यम, बहन के बुलाने पर यम द्वितीया के दिन उनके घर पहुंचे थे। जहां यमुना जी ने भाई की सत्कार कर, उनको तिलक लगा कर पूजन किया। तब से इस दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है।