कार्तिक मास (Kartik month) का आरंभ हो गया है और इस यह महीना बहुत ही पावन माना जाता है। कहते हैं कि सतयुग से कोई युग नहीं और कार्तिक मास से कोई मास नहीं है। आज कार्तिक मास (Kartik month) का पहला शनिवार (Saturday) है। जैसे कि हम जानते हैं कि शनिवार का दिन शनिदेव (Shani Dev) को समर्पित होता है। शनिदेव न्याय के देवता है। 

अभी के समय के बात करें तो मकर, कुंभ, धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती (Sade Sati) और मिथुन, तुला राशि पर शनि की ढैय्या (Dhaiya) चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लगने पर इंसान को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनसे मुक्ति पाने के लिए शनि देव की पूजा की जाती है और कुछ उपाय किए जाते हैं। 

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शनि की साढ़ेसाती (Sade Sati) और ढैय्या (Dhaiya) से मुक्ति के लिए कार्तिक मास (Kartik month) के पहले शनिवार के दिन दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Shani Stotra) की रचना भगवान श्री राम के पिताजी राजा दशरथ ने की थी। दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। 

राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र (Shani Stotra by King Dasharatha)

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।

नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

 

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।

नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

 

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ  वै नम:।

नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।

 

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।

नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

 

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।

सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

 

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।

नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।

 

तपसा दग्धदेहाय नित्यं  योगरताय च।

नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

 

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।

तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

 

देवासुरमनुष्याश्च  सिद्घविद्याधरोरगा:।

त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।

 

प्रसाद कुरु  मे  देव  वाराहोऽहमुपागत।

एवं स्तुतस्तद  सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।