इस बार अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में 19 सितंबर को पड़ रही है। बता दें कि डोल ग्यारस के बाद अनंत चतुर्दशी और उसके बाद पूर्णिमा आती है। इस बार आपने कोरोना काल में की चीजों को खोया और पाया है।  अगर आपने जॉब खोई है और उसे फिर से पाना चाहते हैं तो इस बार की अनंत चतुर्दशी के दिन सिर्फ एक धागा आपकी किस्मत बदल सकता है।

इस दिन भगवान अनंत की पूजा की जाती है वहीं इसी दिन गणेश प्रतिमा विसर्जन भी किया जाता है। छह चतुर्थियों का खास महत्व है- भाद्रपद शुक्ल की अनंत चतुर्दशी, कार्तिक कृष्ण की कृष्ण, रूप या नरक चतुर्दशी, कार्तिक शुक्ल की बैकुण्ठ चतुर्दशी, वैशाख शुक्ल माह की विनायक चतुर्दशी, फाल्गुन मास की चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) और श्रावण मास की चतुर्दशी (शिवरात्रि) का खासा महत्व है।

अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत सूत्र बांधने का विशेष महत्व होता है। इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के बाद बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है।

इस दिन कच्चे धागे से बने 14 गांठ वाले धागे को बाजू में बांधने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होती है। इस धागे को बांधने की विधि और नियम का पुराणों में उल्लेख मिलता है।
अनंत चतुर्दशी के दिन भाद्रपद की शुक्ल चतुर्दशी को कच्चे धागे में 14 गांठ लगाकर उसे कच्चे दूध में डूबोकर ॐ अनंताय नम: का मंत्र जपते हुए भगवान‍ विष्णु की विधिवत रूप से पूजा करना चाहिए।

अनंत सूत्र को पुरुषों को दाएं और महिलाओं को बाएं बाजू में बांधना चाहिए।
अनंत सूत्र (शुद्ध रेशम या कपास के सूत के धागे) को हल्दी में भिगोकर 14 गांठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में ध्यान करते हुए धारण किया जाता है। हर गांठ में श्री नारायण के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है।