देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) का खास पर्व आने वाला है।  इसे देवोत्थान एकादशी (Devotthan Ekadashi) के नाम से भी जानते हैं। बताया जाता है कि देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) के दिन चार माह की नींद के बाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) जागते हैं।

जैसे ही वह नींद उठते हैं तो अपने कार्य यानी की सृष्टि का संचालन करना शुरू कर देते हैं इसलिए देवउठनी ग्याहरस से शादी विवाह और भी कई तरह के शुभ कार्य किए जाते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) 14 नवंबर को पड़ रही है और इस दिन कई शादियां भी है।
जैसे कि हम जानते हैं कि देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है, जिससे भगवान श्रीहरि की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) व्रत नियम-

1. शास्त्रों में सभी 24 एकादशियों में चावल खाने को वर्जित माना गया है। मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से इंसान रेंगने वाले जीव योनि में जन्म लेता है। इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने के साथ ही खान-पान, व्यवहार और सात्विकता का पालन करना चाहिए।
3. कहा जाता है कि एकादशी के पति-पत्नी को ब्रह्नाचार्य का पालन करना चाहिए।
4. मान्यता है कि एकादशी का लाभ पाने के लिए व्यक्ति को इस दिन कठोर शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही लड़ाई-झगड़े से भी बचना चाहिए।
5. एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठना शुभ माना जाता है और शाम के समय नहीं सोना चाहिए।