हर ग्रह का एक निर्धारित समय होता है। नौ ग्रहों की महादशा का समय निश्चित है। जन्म के समय से ही नक्षत्र का प्रभाव शुरू होता है। यानी किसी का जन्म शुक्र की महादशा में होता है तो वहीं से नौ ग्रहों की चाल शुरू होती है।

महादशा काल

हरेक ग्रह की महादशा के लिए एक समय निर्धारित होता है। महादशा का यह समय सूर्य के लिए छह साल, चन्द्रमा के लिए दस, मंगल के लिए सात, राहु के लिए 18, गुरु के लिए 16, शनि के लिए 19, बुध के लिए 17, केतु के लिए सात और शुक्र के लिए २० साल निर्धारित होता है।

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छिद्रदशा

किसी ग्रह की दशा के दौरान उसी ग्रह में दूसरे ग्रह की दशा शुरू होना छिद्रदशा होती है। यह जीवन में परिवर्तन लेकर आती है।

वक्त में बदलाव

वक्त बदलता है तो सितारे बदलते हैं और सितारे बदलते हैं तो इंसान भी बदल जाता है। ग्रहों की दशा और उनकी चाल से मन, विचार आदि में परिवर्तन देखने को मिलता है।

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दोनों प्रभाव

ग्रहों की चाल और महादशा के दोनों तरह के प्रभाव होते हैं, सकारात्मक और नकारात्मक। हालांकि लगातार प्रयास से सकारात्मकता आ सकती है।

संदीप कोचर

सेलेब एस्ट्रोलॉजर, मुंबई

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